बोर्ड परीक्षाएँ साल में दो बार आयोजित करने का ऐतिहासिक निर्णय! मसौदा मंजूर, सार्वजनिक सुझाव आमंत्रित

नई दिल्ली। 25 फरवरी 2025। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने शैक्षणिक सत्र 2026 से कक्षा 10वीं की बोर्ड परीक्षाएँ साल में दो बार आयोजित करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। मंगलवार को हुई बोर्ड की बैठक में इस प्रस्तावित ड्राफ्ट को मंजूरी दी गई, जिसके बाद इसे सार्वजनिक प्रतिक्रिया के लिए जारी किया गया है। हितधारक 9 मार्च तक अपने सुझाव दे सकते हैं, जिसके आधार पर अंतिम नीति तैयार की जाएगी।
क्या है नया प्रस्ताव?
सीबीएसई के अनुसार, नए सिस्टम के तहत छात्रों को एक साल में दो बार बोर्ड परीक्षा देने का मौका मिलेगा। यह व्यवस्था 2026 के शैक्षणिक सत्र से प्रभावी होगी। परीक्षाओं के आयोजन का समय और पैटर्न अभी तय नहीं हुआ है, लेकिन शिक्षा मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, संभावना है कि पहली परीक्षा मार्च-अप्रैल और दूसरी मई-जून में हो सकती है। छात्र दोनों में से बेहतर प्रदर्शन वाले स्कोर को अंतिम मान सकेंगे।
नई व्यवस्था के पीछे उद्देश्य
इस कदम का मुख्य लक्ष्य छात्रों पर परीक्षा का तनाव कम करना और उन्हें अधिक लचीलापन देना है। सीबीएसई अधिकारियों का कहना है कि यह बदलाव राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 की सिफारिशों के अनुरूप है, जिसमें “बोर्ड परीक्षाओं के भार को कम करने” पर जोर दिया गया था। साथ ही, दो बार परीक्षा लेने से छात्रों को अपने कमजोर क्षेत्रों को सुधारने का अवसर मिलेगा।
सार्वजनिक सुझावों का आह्वान
मसौदे को cbse.gov.in पर अपलोड किया गया है। शिक्षाविद्, अभिभावक, छात्र और अन्य हितधारक 9 मार्च तक बोर्ड को ईमेल या पोर्टल के माध्यम से अपनी राय भेज सकते हैं। सीबीएसई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सभी फीडबैक की समीक्षा के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा। यह प्रक्रिया पारदर्शी और समावेशी होगी।
सीबीएसई ने स्पष्ट किया है कि 2025 की परीक्षाएँ पहले की तरह वार्षिक आधार पर ही आयोजित होंगी। नई व्यवस्था का विवरण, जैसे परीक्षा तिथियाँ, पाठ्यक्रम विभाजन, और मूल्यांकन प्रक्रिया, अगले कुछ महीनों में साझा किया जाएगा। बोर्ड ने यह भी आश्वासन दिया है कि स्कूलों और छात्रों को नए सिस्टम के अनुकूल बनाने के लिए समय रहते दिशा-निर्देश जारी किए जाएँगे।
इस बदलाव के साथ, सीबीएसई एक बार फिर भारतीय शिक्षा प्रणाली में प्रगतिशील सुधार की दिशा में अग्रसर है। अब यह देखना होगा कि यह नीति छात्रों के लिए कितनी कारगर साबित होती है।