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झिंझाना(उस्मान चौधरी) रजाक नगर गांव का वाल्मीकि मंदिर स्थल दशकों से विकास की बाट जोह रहा है। दशकों पहले मंदिर स्थल पर लगा नल भी कूड़े के ढेर में दबा है। गांव प्रधान ने उक्त स्थल के विकास एवं सौंदर्यीकरण के लिए प्राथमिकता पर कार्य योजना को तैयारी शुरू की है।
लगभग 4-5 हजार की आबादी वाला निकटवर्ती गांव रजाक नगर कश्यप समाज बाहुल्य गांव है। जिसमें वर्ष 1980 में पूर्व गांव प्रधान लख्मीचंद के प्रयासों से वाल्मीकि फुलवारी के लिए चकबंदी में स्थान सुरक्षित हुआ था। जिस पर स्वर्गीय श्रीचंद के द्वारा वाल्मीकि मंदिर का शिलान्यास कर जगह की छोटी सी घेराबंदी की गई थी। वर्ष 1995 से 2010 तक लगातार तीन योजनाओं में गांव प्रधान रहे लखमी चंद द्वारा उक्त स्थल पर एक नल भी लगवाया गया था। बाद में समाज एवं गांव प्रधानो की उदासीनता के चलते यह वाल्मीकि मंदिर स्थल कूड़े के ढेर में तब्दील हो रहा है। जो गांव प्रधान,सरकार एवं क्षेत्रीय नेताओं की दलितोत्थान योजनाओं की पोल खोल रहा है। वर्ष 2010 के बाद लगातार दो योजनाओं में काबिज रहे पूर्व प्रधान विनोद ने भी इस और कोई ध्यान नहीं दिया। बाल्मीकि समाज से रांगल, पोला, राजवीर , कंवरपाल ,विकास, मिंटू , राजपाल, सनी आदि ने समाज के इस मंदिर स्थल पर भवन एवं मंदिर निर्माण की इच्छा जताई है। गौरतलब हो कि गांव के अंदर वाल्मीकि समाज के लिए कोई भी सार्वजनिक स्थल ऐसा नहीं है जो उनके किसी काम आ सके। इसी के मद्देनजर गांव प्रधान सोराज सिंह ने उक्त स्थल का दौरा कर इसके विकास के लिए कार्य योजना पर प्राथमिकता से तैयारी शुरू कर दी है। गांव प्रधान ने वाल्मीकि समाज के मोहल्ले में दशकों से अटके पड़े रास्ते एवं उक्त स्थल के विकास को प्राथमिकता के साथ पूरा करने का भरोसा जताया है।

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