नशा खोरी मानसिक विकार है – संत मेघनाथ

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झिंझाना 17 जून। शुल्फा आदि का नशा करना एक मानसिक विकार है। जिससे प्रत्येक इंसान को ही नहीं बल्कि साधु समाज को भी बचना चाहिए।
नाथ संप्रदाय से जुड़े सन्त मेघनाथ साधु समाज में मजबूत पकड़ रखते हैं। जिनके असंख्य शिष्य साधु वेश धारण कर समाज और सनातन धर्म की रक्षा के लिए कार्यरत है करनाल हाईवे पर स्थित गांव लक्ष्मणपुरा के मंदिर में उनके शिष्य द्वारा 41 दिनों के लिए अग्नि तपस्या के बतौर पंच धुनों के बीच खुले आसमान में दोपहर के वक्त 3 घंटे बैठकर प्रतिदिन तपस्या करने का हठ योग चल रहा है। इस अवसर पर संवाददाता द्वारा सुल्फे का नशा आदि को लेकर गुरु और चेला से बात की गई। जिसमें गुरु मेघनाथ ने स्पष्ट संदेश दिया कि
नशा, चोरी, जारी, राहजनी, ठगी आदि मानसिक विकारों में शुमार होता है। जिससे इंसान ही नहीं साधु समाज को भी बचना चाहिए। जबकि शिष्य बाबा कालु नाथ कहते हैं कि ऋषि-मुनियों के लिए यह एक जड़ी बूटी है।सुल्फा पीने से उनका ध्यान केंद्रित होकर भगवान की भक्ति में लीन होता है। बाबा आजकल कोरोना महामारी से मुक्ति मिलने और कुटिया में मंदिर का निर्माण हो, एवं आत्मिक शुद्धि करण हो सकें, इसी उद्देश्य को लेकर वह सातवीं बार 41 दिनों के लिए अग्नि तपस्या में लीन है।

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