विधानसभा चुनाव प्रचारक बने फेसबुक व्हाट्सएप

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कैराना। विधानसभा चुनाव में प्रत्याशियों के  तरीके रिक्शा मैं लाउडस्पीकर एवं झंडे बैनर तथा पोस्टरों से किए जाने वाला प्रचार कोरोना काल में व्हाट्सएप और डिजिटल माध्यम से किये जाने के” कारण बदल चुका है।
विधानसभा चुनाव प्रचार शुरू होते हैं। प्रत्येक प्रत्याशी जगह-जगह कार्यालय खोलकर अपने अपने समर्थक कार्यकर्ताओं को झंडे बैनर पोस्टर पंपलेटो का विवरण करके अपना प्रचार कराने पर जोर देते थे प्रत्याशियों के समर्थक झंडों को गांव-गांव गली मोहल्ले में मकानों की छतों पर लगाने साथ दीवारों पर पोस्टर तथा बड़े-बड़े बहनों को लगाकर अपने-अपने प्रत्याशियों को हौसला बढ़ाने का काम करते थे जिन्हें देखते ही बाहर से आने वालों को यह एहसास हो जाता था। कि किस क्षेत्र में कौन प्रत्याशी भारी पड़ रहा है यही नहीं चुनाव कार्यालय से बच्चों को बिल्ले तथा स्टीगर वितरण किए जाने के कारण बच्चों की भीड़ लगी रहती थी तथा घोड़े तांगो में लाउडस्पीकर से प्रचार करने वाले कार्यकर्ता गली मोहल्लों में पंपलेट तथा स्टीगर बांटकर प्रचार करते थे तो बच्चों में भीड़ बच्चों की भीड़ उन्हें घेर लेती दी थी तथा जिस पार्टी के प्रचार का घोड़ा तांगा गांव में पहुंचा था उसके ही समर्थन में बच्चे नारे लगाने लगते थे लेकिन कोरोना काल मे हो रहे विधानसभा चुनाव में प्रचार का तरीका बदल गया है। प्रत्याशियों फेसबुक व मोबाइल फोन पर वॉइस मैसेज भेजकर वोट मांग रहे हैं। तथा वाहनों में गांव-गांव पहुंचकर कार्यकर्ता घर-घर जाकर मतदाताओं से वोट देने की अपील के साथ प्रत्याशी नुक्कड़ सभाओं में अपनी पार्टी की नीतियों कार्यरत गुणगान करने पर मजबूर हो रहे हैं।

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